ज़कात आपकी उस दौलत का 2.5% है जो निसाब के बराबर या ज़्यादा हो और जिस पर एक क़मरी (इस्लामी) साल गुज़र गया हो। नीचे चार आसान क़दम और आज के रेट से एक मिसाल है।
| घर में नक़द | ₹40,000 |
| बैंक बैलेंस | ₹2,60,000 |
| 30 ग्राम 22 कैरेट ज़ेवर × ₹12,730/ग्राम | ₹3,81,893 |
| फ़िक्स्ड डिपॉज़िट | ₹1,00,000 |
| घटाएँ: क्रेडिट कार्ड + इस साल की EMI | −₹45,000 |
| कुल ज़कात वाली दौलत | ₹7,36,893 |
| निसाब (₹1,22,411) से ज़्यादा? हाँ → 2.5% ज़कात | ₹18,422 |
जब आपकी दौलत एक क़मरी साल (लगभग 354 दिन) तक निसाब से ऊपर रहे — इसे हौल कहते हैं। आसान तरीक़ा: एक तारीख़ तय कर लें (बहुत लोग रमज़ान का कोई दिन चुनते हैं) और हर साल उस दिन जो कुछ आपके पास है उसका हिसाब करें।
आज का निसाब: ₹1,22,411 · सोने पर ज़कात — ज़ेवर, सिक्के और बिस्किट · ज़कात किस पर फ़र्ज़ है, और कितनी देनी होती है?
Zakatify एक-एक सवाल पूछकर हिसाब करता है — कैरेट के हिसाब से सोना, बचत, निवेश, क़र्ज़ — आपके शहर के आज के रेट के साथ। मुफ़्त, निजी, भारत के लिए बना।
मेरी ज़कात निकालें — मुफ़्त2.5% — यानी हर ₹1,00,000 पर ₹2,500, पूरी ज़कात वाली दौलत पर जब वह निसाब के बराबर या ज़्यादा हो।
दोनों सही राय हैं। चाँदी का निसाब (आज ₹1,22,411) कम है, इसलिए ज़्यादा लोग ज़कात देते हैं और ग़रीबों तक ज़्यादा पहुँचता है; बहुत से उलमा इसी की सलाह देते हैं। सोने का निसाब (आज ₹12,14,835) भी माना जाता है।
आम राय यह है कि सिर्फ़ आने वाले साल की EMI घटाएँ, पूरा बचा हुआ लोन नहीं।